मां राजेश्वरी की पावन धरा Taltoli मैं तीन दिवसीय सकलीकरण पाठ का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है। यह सकलीकरण पाठ 15 जनवरी 2024 से 17 जनवरी 2024 (मकर संक्रांति से तीन गते माघ) तक किया जाएगा। जिसमें मंदिर समिति तालतोली के अध्यक्ष श्री कमल सिंह राणा, उपाध्यक्ष श्री दयाल सिंह राणा, कोषाध्यक्ष श्री देवी प्रसाद बगवाड़ी, मंत्री दौलत सिंह रावत, उप मंत्री आनंद सिंह नेगी रहेंगे। सभी लोगों को यह तो पता हैं कि तालटोली में सकलीकरण पाठ का आयोजन किया जा रहा है लेकिन कुछ लोग इस शब्द से अनजान हैं, सकलीकरण का अर्थ ग्रंथों में इस प्रकार वर्णित है कि- मन की शुद्धि, वचन की शुद्धि, काया की शुद्धि, और कषाय की हानि -परमात्मा सकलीकरण की यही क्रिया है। Taltoli में इस प्रकार के क्रियाकलाप लगातार चलते रहते हैं।
| Taltoli मे तीन दिवसीय सकलीकरण पाठ का आयोजन |
| मेले का आयोजन - Taltoli |
| तालतोली के निकट भगवान भैरवनाथ का प्रसिद्ध मंदिर |
| Taltoli मंदिर |
| कब लगता है Taltoli Mela |
| कैसे जा सकते हैं Taltoli |
| झूला कब झुलाया जाता है? |
| तालतोली के आसपास के स्थान |
| निष्कर्ष |
Taltoli मे तीन दिवसीय सकलीकरण पाठ का आयोजन
राजराजेश्वरी के परम भक्तों को यह जानकर अति प्रसन्नता होगी कि पौराणिक संस्कृति की विरासत मां राजराजेश्वरी स्थान- तालतोली में दिनांक 15 जनवरी 2024 से 17 जनवरी 2024 तक तीन दिवसीय सकलीकरण पाठ का आयोजन किया जाना सुनिश्चित हो हुआ है। इसमें सभी परिवारों के सदस्य गण सतनाजा जौ का आटा, मंडुवे का आटा, जौ तिल लाकर इस सकलीकरण पाठ के लिए अर्पित कर सकते हैं।
पूर्णम श्री भुवनेश्वरी भगवती श्री राज-राजेश्वरी।
पूर्णम भैरव भैरवाय वटुका, पूर्णम सदा कालिका।।
मेले का आयोजन - Taltoli
हर वर्ष चैत्र माह की अष्टमी और नवमी को रुद्रप्रयाग जिले के तालतोली नामक स्थान पर एक प्रसिद्ध मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें क्षेत्र के समस्त व्यक्ति और दूर-दराज के लोग शामिल होते हैं। यह मेला कोई व्यापारिक मेला नहीं है यहां लोग देवी मां के दर्शन करने के लिए आते हैं। Taltoli मेले के लिए सबसे आकर्षण का केंद्र बिंदु 'देवी मां का झूला' और 'पूर्ण रूप से घी द्वारा किया जाने वाला यज्ञ' है। तालतोली नामक स्थान चारों ओर से वृक्षों से घिरा हुआ है लेकिन फिर भी मेले के दौरान यहां दर्शन करने वालों की संख्या हजारों में रहती है। पूरे क्षेत्र में मां राजा राजेश्वरी बहुविख्यात देवी है। क्षेत्र की सम्रांत जनता मा राज्यराजेश्वरी में पूर्ण आस्था और विश्वास रखती हैं। साथ ही क्षेत्र के लोग भगवान भैरवनाथ में भी पूर्ण आस्था और विश्वास रखते हैं।
तालतोली के निकट भगवान भैरवनाथ का प्रसिद्ध मंदिर
तालतोली के निकट नया गांव में बहुत चर्चित भैरवनाथ का मंदिर भी है। यह मंदिर आकार में बहुत छोटा है, लेकिन इस मंदिर की चर्चाएं पूरे क्षेत्र में बहुत ही अधिक रहती है, माना जाता है कि यहां से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता है। किसी विवादित मामले पर क्षेत्रवासी न्याय के लिए न्यायालय के दरवाजे पर जाना उचित नहीं समझते, बल्कि सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति भगवान भैरवनाथ से न्याय की गुहार लगाता हैं। क्षेत्रवासियों का मानना है कि भगवान भैरवनाथ उनको उचित न्याय प्रदान करते हैं।
तालतोली के निकट देवांगण गांव में भैरवनाथ का दूसरा प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर की भी क्षेत्र में काफी चर्चाएं रहती हैं। जिस प्रकार वर्तमान में धीरेंद्र शास्त्री सच्च का बखान करते नजर आते हैं। उसी प्रकार इस मंदिर के पुजारी भी सच का खुलासा करते हैं।
Taltoli मंदिर
तालतोली का प्रसिद्ध मंदिर उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले के तुलंगा गांव के निकट स्थित है। यह मंदिर भक्तों के लिए हमेशा खुला रहता है। प्रत्येक त्योहार पर यहां विशाल रूप से पूजा अर्चनाएं की जाती हैं। शिवरात्रि को इस स्थान पर बहुत ही बेहतर ढंग से मनाया जाता है। Taltoli मंदिर पूर्ण रूप से किसी एक गांव का मंदिर नहीं है यह मंदिर 11 गांव का सामूहिक मंदिर है। जिसमें तुलंगा, खेड़ा, चौंडी, भिनोली सल्या, देवांगण, ल्वाणी, अंद्रवाणी, नमोली, ल्वारा, जमलोक गांव सामिल है।
कब लगता है Taltoli Mela
मेले की तिथि पहले से निश्चित नहीं रहती है। मेले की तिथि की घोषणा तालतोली मंदिर समिति द्वारा की जाती है। मेला चैत्र माह की अष्टमी और नवमी के दिन आयोजित किया जाता है। यह दो दिवसीय मेला हर वर्ष आयोजित किया जाता है। यहां रुद्रप्रयाग जिले के लोगों आते हैं, साथ ही पूरे उत्तराखंड से लोग भी आते हैं। मेले को आकर्षण का केंद्र बिंदु बनाने के लिए मेला समिति द्वारा यहां गढ़वाल के प्रसिद्ध कलाकारों को भी बुलाया जाता है। यहां अधिकतर वही लोग आते हैं जो देवी मां में आस्था और विश्वास सकते हैं।
कैसे जा सकते हैं Taltoli
तालतोली जाने के लिए सबसे पहले आपको उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में प्रवेश करना होगा । रुद्रप्रयाग से अगस्त्यमुनि होते हुए गुप्तकाशी बाजार में जाना होगा। गुप्तकाशी से आसानी से तुलंगा के लिए गाड़ियां मिल जाती है। तुलंगा में ही मां राजराजेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर Taltoli स्थित है Taltoli जाने के लिए गूगल मैप का सहारा लिया जा सकता है यह मंदिर गूगल मैप पर आसानी से मिल जाता है।
झूला कब झुलाया जाता है?
तालतोली मेला मां दुर्गा को झूला झुलाने के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन सभी श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल बना रहता है कि देवी मां को झूला किस समय झुलाया जाता है? Taltoli Temple मे मेले के दिन ही दोपहर के बाद मां राजराजेश्वरी की डोली झूला झूलती है। और मंदिर प्रांगण की परिक्रमा भी करती है। जिस समय झूला झुलाया जाता है। उस समय श्रद्धालु देवी मां की डोली पर फूल और चावल डालते हैं। और देवी मां को झूला झूलने में सहायता कर रहे पुजारी लोगों पर चावल डालते हैं और लोग उन चावलों को देवी मां का आशीर्वाद समझकर अपने पास रखते हैं। और परिवार के सभी सदस्यों को देवी मां के आशीर्वाद के रूप में उन चावलों को दिया जाता है। और मायके आई हुई स्त्रियां उन चावलों को अपने ससुराल में देवी मां के आशीर्वाद के रूप में ले जाती हैं।
तालतोली के आसपास के स्थान
तालतोली नाम सुनकर सभी लोग यह जानना चाहते हैं की तालतोली के आसपास कौन-कौन से स्थान है ?और कौन-कौन से गांव हैं? Taltoli के सबसे नजदीक तुलंगा गांव इसके बाद खेड़ा गांव, चौंडी गांव, भिनोली गांव, सल्या गांव, देवांगण गांव, ल्वाणी गांव, अंद्रवाणी गांव, नमोली गांव, ल्वारा गांव, जमलोक गांव स्थित है। इसके बाद तालतोली के निकट गुप्तकाशी नामक शहर स्थित है। गुप्तकाशी में काशी विश्वनाथ का मंदिर है। इसके बाद तुंगनाथ मंदिर और ऊखीमठ में मद्महेश्वर मंदिर स्थित है। यह संपूर्ण क्षेत्र शैव संप्रदाय से संबंध रखता है। इस क्षेत्र के अधिकतम लोग शिव के उपासक हैं। यहां के लोगों का व्यवसाय भी शिव से संबंध रखता है। क्योंकि जब श्रद्धालु केदारनाथ जाते हैं तो, आसपास के क्षेत्र के लोग वंही से अपनी आजीविका प्राप्त करते हैं। कुछ लोग केदारनाथ जाकर वहां दुकान चलाते हैं, और कुछ लोग मंदिर में पूजा की थालियां बेचते हैं, इस प्रकार आसपास के लोग अपना रोजगार करते हैं। इस क्षेत्र के निकट प्रसिद्ध बाणासुर का मंदिर भी स्थित है। बाणासुर कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के ससुर थे। बाणासुर को शिव जी का वरदान था कि शिवाजी बाणासुर की हर स्थिति में सहायता करेंगे। जब कृष्ण ने बाणासुर पर हमला किया था। तब भगवान शिव ने बाणासुर की सहायता की थी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड अपनी संस्कृति परंपराओं और खान-पान के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। उत्तराखंड के कई स्थानों पर ऐसे अद्भुत मेले लगते हैं, जिनको देखने के लिए विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु पहुंचते हैं , यह मेले उत्तराखंड की संस्कृति के प्रतीक है। कुछ मेले ऐसे लगते हैं जिनमे देवी देवताओं की पूजा अर्चना की जाती है। और कुछ मेले ससुराल गई स्त्रियों की मायके पक्ष से मुलाकात के उद्देश्य से लगाये जाते थे। कुछ मेले अपनी कला का आदान-प्रदान करने के लिए लगाए जाते हैं । कुछ मेले कृषकों की तकनीक से संबंधित लगते हैं तो कुछ मेले व्यापार के उद्देश्य से लगते हैं। उत्तराखंड में कई स्थानों पर इन मेलों को स्थानीय भाषा में थौला भी कहा जाता है। इन मेलों में स्थानीय लोग अपने हाथों से निर्मित विभिन्न प्रकार के उपकरण, वस्त्र और अन्य सामान की बिक्री करते हैं। इन मेलों में एक प्रसिद्ध मेला Taltoli मंदिर मे उत्तराखंड का प्रसिद्ध मेला Taltoli Mela लगता है। यह मेला रुद्रप्रयाग जनपद के Tulanga गांव में लगता है। यहां मेले के दिन मां राजराजेश्ववरी की पूजा अर्चना की जाती है। और देवी मां को झूला झुलाया जाता है। इस मेले की एक प्रमुख मान्यता यह है कि, जो भी इस मेले में सामिल होता है, मां राजराजेश्वरी उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है। क्षेत्र के सभी लोग मां राजराजेश्वरी पर पूर्ण आस्था और विश्वास रखते हैं। रुद्रप्रयाग जिले के तुलंगां गांव में स्थित Taltoli तीन मंदिरों का समूह और देवी मां को झूला झुलाने के लिए प्रसिद्ध है। देवी मां को झूला झूलना मेले के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बन जाता है।
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