लगातार चर्चा में रहा यह कानून जिसका नाम Hit And Run Law है। इसका विरोध पूरे देश में लगातार जोरों से चल रहा है। इससे पहले भी सरकार ने कृषि कानून लाकर गरीब किसानों को न चाहते हुए भी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया था। एक बार फिर से चुनाव का दौर आने वाला है। और चुनाव से पहले ही सरकार इस तरीके के एक नये कानून को ले कर आई है। जो किसी भी गरीब व्यक्ति को रास नहीं आ रहा है। या इस कानून की तुलना एक ऐसे कानून से की जा सकती है। "जो 8 मार्च 1919 को तात्कालिक ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किया गया था। 8 मार्च 1919 को लागू किए गए इस कानून का नाम रॉलेक्ट एक्ट था। जिसे काला कानून के नाम से जाना जाता है। इस एक्ट के तहत ना अपील, ना दलील, ना वकील वाला सिद्धांत लागू किया जाता था। अर्थात बिना कुछ सोचे समझे ही सीधे जेल में डाल देने का प्रावधान था"। हिट एंड रन कानून को भी लोग ना अपील, ना दलील, ना वकील वाला कानून बता रहे हैं। इस तथ्य में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि आगेे की गई है। यह एक सोचनीय तथ्य है कि, यदि इस कानूून में सिर्फ और सिर्फ अच्छाई होती तो, पूरेे भारतवर्ष के लोग सड़कोंं पर उतरकर, नरेंद्रेंर मोदी की बहुमत वाली सरकार के द्वारा लाए गए इस हिट एंड रन कानून का विरोध क्यों करते। और यदि इस कानून में सिर्फ नकारात्मक तत्व ही विद्यमान होते तो एक बहुमत वाली सरकार ऐसे कानून को पारित क्यों करती।
| Hit And Run Law |
| हिट एंड रन कानून के फायदे |
| हिट एंड रन कानून के नुक़सान |
| हिट एंड रन कानून में सुधार की गुंजाइश |
| निष्कर्ष |
Hit And Run Law
गलत ड्राइविंग या लापरवाही के कारण किसी भी व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है। तो Hit And Run Law के तहत ड्राइवर बिना प्रशासन को सूचना दिए वहां से फरार नहीं हो सकता है। यदि ड्राइवर ऐसा करता है तो उसे 10 साल तक की सजा का प्रावधान और ₹700000 तक का जुर्माना भी लग सकता है।
सरकार लगातार नये कानूनों को लाकर पुराने कानून में परिवर्तन करती जा रही है। लोग यह सोच रहे हैं कि सरकार उनके विरोध में इन कानून को पारित कर रही है। लेकिन किसी भी सिक्के के दो पहलू होते हैं। वैसे ही इस कानून के भी दो पहलू है। एक तरफ सरकार यह चाहती है कि वाहन चालक इस कानून के भय से ड्राइविंग करते समय सावधानी बरतेंगे, और दूसरी तरफ वाहन चालकों का यह मत है कि, कोई भी वाहन चालक यह नहीं चाहता है कि, उसके वाहन के साथ दुर्घटना हो। लेकिन कभी किसी कारण वश वाहन दुर्घटना हो जाती है तो हिट एंड रन कानून के तहत वाहन चालक को दुर्घटना स्थाान पर ही रुकना अनिवार्य होगा। यदि वाहन चालक उस समय वहां पर नहीं रुकता है तो वाहन चालक को 10 साल तक की सजा और 7 लख रुपए तक का जुर्मााना भी लग सकता है। लेकिन दुर्घटना के समय लोग वाहन चालक के विरोध मेंं खड़े हो जाते हैं। और आक्रोश में आकर लोग वाहन चालक को मार भी सकते हैं। इसी कारण लगातार लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं।
हिट एंड रन कानून के फायदे
किसी भी कानून के कई पक्ष हो सकते हैं। विभिन्न विचारक अपने ज्ञान के अनुसार या अपने परिस्थितियों के अनुसार किसी कानून पर सकारात्मक या नकारात्मक मत प्रस्तुत कर सकते हैं। इसका इसका यह तात्पर्य बिल्कुल नहीं होता है कि, कोई भी मत पूर्णतया तार्किक होगा। ऐसा माना जा सकता है कि, किसी कानून पर प्रस्तुत मतों में कोई मत अधिक तार्किक और कोई मत कम तार्किक हो सकता है। इस Hit And Run Law के फायदे और नुकसान दोनों हैं। हिट एंड रन लॉ के फायदे इस प्रकार हो सकते हैं।
कभी-कभी भय के कारण मानव सतर्कता से अपने कार्य को करता है। यह भय सजा के रूप में हो सकता है या फिर आर्थिक दंड के रूप में भी हो सकता है। हिट एंड रन कानून मे भी इसी प्रकार से दंड का प्रावधान किया गया है। वाहन चालक कई बार शराब के नशे में ड्राइविंग कर लेते हैं। यदि वाहन चालक शराब पीते हैं तो, उनके मन में हिट एंड रन कानून को लेकर डर रहेगा, और वह शराब के नशे में ड्राइविंग नहीं करेंगे। विशेषज्ञों ने इस बात को ध्यान में रखा की यदि वाहन चालकों में भय की स्थिति बनी रहेगी तो वाहन चालक नियमित गति से वाहनों को सड़क पर दौड़ायेंगे। जिससे कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की संभावनाएं बन सकती है। कई बार ड्राइवर एक्सीडेंट के बाद भाग जाते हैं और उनको पकड़ना काफी मुश्किल होता है। इस कानून के तहत आसानी से उनको पकड़ा जा सकता है। क्योंकि कानून स्पष्ट कर देता है कि, दुर्घटना के बाद ड्राइवर दुर्घटना स्थान से भाग नहीं सकता। यदि ड्राइवर ऐसी स्थिति में वहां से भागता है, तो उसे 10 वर्ष तक की कारावास की सजा और 7 लख रुपए तक का आर्थिक दंड देना पड़ सकता है। इस भय से वाहन चालक वहां से नहीं भाग सकता है। हिट एंड रन कानून के भय के कारण वाहन चालक सडक पर अनियंत्रित होने वाली गति से वाहनों को नहीं दौड़ायेंगे।
हिट एंड रन कानून के नुक़सान
एक तरफ सरकार ने इस कानून के सकारात्मक पक्षों को देखते हुए इस कानून को लाने का फैसला किया। वहीं दूसरी तरफ आम जनता को इस कानून के नुकसान नजर आ रहे हैं। किसी भी कानून के सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष हो सकते हैं। उसी प्रकार Hit And Run Law के भी काफी सारे नुकसान हैं। कुछ लोग तो इस कानून को ना अपील ना दलील ना वकील के सिद्धांत वाला कानून कह रहे हैं। जिसका सीधा सा यह अर्थ है कि सरकार यह कानून थोप रही है। कुछ लोग तो इस कानून को काला कानून या मनमर्जी का कानून कह रहे हैं। वास्तव में इस कानून के नुकसान भी हैं। जब कहीं पर वाहन दुर्घटना हो जाती है तो वाहन चालक के विरोध में लोग खड़े हो जाते हैं। लोगों में उस वक्त इतना आक्रोश होता है कि, लोग उस समय वाहन चालक को मौत के घाट भी उतार सकते हैं। Hit And Run Law के तहत यदि वाहन चालक दुर्घटना के बाद वहां से फरार हो जाता है तो वाहन चालक को 10 वर्ष तक की सजा और 7 लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। कोई भी वाहन चालक यह कभी नहीं चाहेगा कि, उसके साथ वाहन दुर्घटना हो। हर कोई सुरक्षित ड्राइविंग करना चाहता है। लेकिन कभी किसी कारणवश यदि कोई दुर्घटना हो जाती है तो वाहन चालक लोगों के आक्रोश से बचने के लिए कुछ समय के लिए वहां से फरार हो जाता है, जो उस समय जाहन चालक की जान बचाने के लिए अति आवश्यक होता है। लेकिन यह कानून वाहन चालक को उस समय वहां पर रोके रखता है।
ड्राइवर कभी भी कोई अमीर व्यक्ति नहीं बनता और जो व्यक्ति ड्राइविंग कर रहा है। वह 5000 से 10000 रुपए महीना कमाता है। और यदि उससे जुर्माने के तौर पर 7 लाख रुपए मांगे जाएंगे तो वह इतनी बड़ी रकम कभी नहीं चुका सकेगा। इसलिए इस कानून की आलोचना करना भी उचित है। यदि लोग यह सोचते हैं कि, ड्राइविंग से उनको 10 वर्ष तक की कारावास की सजा हो सकती है तो, लोग ड्राइवर बनना पसंद नहीं करेंगे और देश में लाखों वाहन खड़े-के-खड़े रह जाएंगे। भविष्य में देश में वाहन चालकों की कमी नजर आएगी। लोग सड़कों पर अपनी गाड़ी चलाने से डरेंगे। यह बात बिल्कुल सत्य है कि कोई भी वाहन चालक यह बिल्कुल भी नहीं चाहेगा कि उनके साथ वाहन दुर्घटना जैसी कोई स्थिति हो।
इस कानून का एक बड़ा नुकसान यह देखने को नजर आ रहा है कि, पूरे देश में लाखों वाहन चालको ने सड़क में वाहनों को इस प्रकार से खड़ा किया है कि, कोई दूसरा वाहन सड़क को पार नहीं कर पा रहा है। ऐसी स्थिति में आयात - निर्यात रुक गया है। ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहेगी तो देश की अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है। सड़कों में वाहनों का चलना बंद हो गया है। लोगों को कई किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर राशन उपलब्ध नहीं हो पा रहा। नियमित परिवहन के अभाव में साग-सब्जी और दूध-दही से संबंधित समान बाजारों तक न पहुंचने के कारण खराब हो रहा है। यदि लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो बहुत सारे स्थानों पर भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी।
हिट एंड रन कानून में सुधार की गुंजाइश
इतिहास में ऐसे विभिन्न कानून लाए गए थे जिनमें संसोधन किया गया है। इस प्रकार इस कानून में भी कुछ संसोधन किये जा सकते है । इस कानून में जिस प्रकार यह व्यवस्था की गई है कि वाहन चालक का घटनास्थल पर उपस्थित रहना आवश्यक होगा। यदि घटना के बाद वाहन चालक घटनास्थल पर मौजूद रहा तो लोग वाहन चालक को वहीं पर मौत के घाट भी उतार सकते हैं । इस कानून में यह संशोधन किया जा सकता है कि, घटना के तुरंत बाद वाहन चालक का घटनास्थल पर मौजूद रहना अनिवार्य न किया जाए। और घटना के बाद कुछ निश्चित समय में वाहन चालक निकटतम पुलिस थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराये। इस कानून में आर्थिक दंड की राशि को घटकर भी संशोधन किया जा सकता है क्योंकि सभी वाहन चालकों के पास इतनी अधिक धनराशि का होना संभव नहीं है।
निष्कर्ष
इस कानून के नकारात्मक पक्षों को देखते हुए सकारात्मक पक्षों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है, और ना ही इसके नकारात्मक पक्षों को नजर अंदाज किया जा सकता है। Hit And Run Law और वाहन चालकों के मध्य सामंजस्य स्थापित करते हुए सरकार को इस कानून में कुछ संशोधन करने चाहिए। और यदि सरकार इस कानून में संशोधन करने के लिए राजी नहीं होती है। और वाहन चालक लंबे समय तक सड़क जाम करते हैं तो, देश में परिवहन व्यवस्था डगमगा सकती हैं और इसका सीधा सा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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