उत्तराखंड अपनी संस्कृति और परंपराओं के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। वक्त के साथ पूरे देश में सभी राज्यों का खानपान बदलता गया। लेकिन उत्तराखंड एक ऐसा राज्य बना रहा जहां खानपान के क्षेत्र में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बहुत ही कम देखने को मिलता है। उत्तराखंड में ऐसे अनेक ऐतिहासिक खाद्य पदार्थों के उदाहरण है, जो हजारों सालों पहले से उत्तराखंड में बनाए जाते हैं । समय के साथ उत्तराखंड ने विकास भी किया लेकिन इस विकास में उत्तराखंडअपने इतिहास को कभी नहीं भूला। वर्तमान में विभिन्न प्रकार के केमिकल युक्त खाद्य पदार्थ बाजारों में उपलब्ध हो जाते हैं। जिनसे विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होने का खतरा रहता है। उत्तराखंड में अधिकतर इस प्रकार के खाद्य पदार्थों का प्रयोग किया जाता है जो केमिकल रहित होते हैं। यहां इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। जो भी लोग इस प्रकार के कैमिकल रहित भोजन का प्रयोग करते हैं वह लंबी आयु प्राप्त करते हैं। और उन्हें बीमारियों का खतरा भी कम रहता है। इसी प्रकार केमिकल रहित भोजन में कपला Kapala का नाम भी आता है। पालक का कापला उत्तराखंड का बहुप्रसिद्ध भोजन है। कपला पालक के पत्तों द्वारा बनाया जाता है। जहां हम समझने की कोशिश करेंगे की पालक का कापला कैसे बनाया जाता है। और Kapala में कौन-कौन से विटामिन्स, और कौन-कौन से मिनरल्स पाए जाते हैं? क्या Kapala सभी के लिए लाभदायक होता है?
Palak का Kapala कैसे बनाया जाता है
पालक का कापला यह नाम सभी ने सुना ही होगा लेकिन कुछ लोगों को यह पता ही नहीं होता कि यह कैसे बनाया जा सकता है। पालक का Kapala बनाना बहुत ही आसान है। इसे सिर्फ कुछ मिनट की मेहनत और मशक्कत के बाद तैयार किया जा सकता है, इसका स्वाद बहुत ही बेहतर होता है। Kapala उत्तराखंड के प्रसिद्ध खाद्य पदार्थ में से एक है। पालक का कपला बनाने के लिए सबसे पहले पालक के पत्तों को साफ पानी में धो लेना चाहिए। उसके बाद पालक के पत्तों को कढ़ाई में डाल देना चाहिए। ध्यान रहे पालक का कपला बनाने के लिए लोहे की कढ़ाई का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। उसके बाद धीमी आंच में पालक के पत्तों को अच्छी तरह से उबाल लेने के बाद उसमें थोडे से आटे का घोल बनाकर डाल देना चाहिए। इसके बाद इसको अच्छी तरह से उबालना आवश्यक है। उसके बाद किसी दूसरे बर्तन में तेल डालकर गर्म कर देना चाहिए। उसके बाद तेल में कुछ लाल मिर्चों को तलने के बाद उनमें से अधिकतम मिर्चों को निकाल दिया जाना चाहिए। उसके बाद उसी तेल में जखिया (कपला का स्वाद बनाए रखने के लिए आवश्यक) या तड़का लगाने के लिए कुछ और भी प्रयोग कर सकते हैं। और इसी तेल में लहसुन की कुछ फलियों को काटकर डालने के बाद पीला होने तक पकाना चाहिए। इसके बाद इसको पालक वाली कढ़ाई में ऊपर से डाल देना चाहिए। ध्यान रखें यदि तेल गर्म हो तो सुरक्षा का ध्यान अवश्य रखें।अब पालक का कपला बनकर तैयार हो चुका है । पालक का कपला खाने का मजा सिर्फ मोटे चावलों से बने भात में ही आ सकता है इसमें अन्य खाद्य पदार्थों को खाने में उतना अच्छा स्वाद नहीं आयेगा जितना की मोटे चावलों से बने भात में आएगा। इसके बाद थाली में भात को परोष लेंगे और कपला भी परोसेंगे, इसके साथ में तली हुई मिर्ची को भी स्वाद के अनुसार खा सकते हैं। ध्यान रहे डॉक्टरों ने जिन लोगों मिर्ची रहित खाना खाने का सुझाव दिया है वे लोग इसमें मिर्ची का प्रयोग ना करें।
पालक में कौन कौन से महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं।
सभी ने यह तो सुना ही होगा कि Palak में उपस्थित विटामिन्स हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। लेकिन बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि पालक में कौन-कौन से विटामिन पाए जाते हैं। पालक में विटामिन ई दूध से 66 गुना ज्यादा पाया जाता है। पालक में प्रोटीन, खनिज, आयरन और इसके अलावा भी कई विटामिन पाए जाते हैं। जो शरीर में हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। और शरीर में खून की मात्रा की कमी होने से रोकता है। पालक को हमेशा खाने से शरीर में इम्यूनिटी अच्छी बनी रहती है। और शरीर हमेशा ऊर्जा से भरा रहता है। यदि 100 ग्राम पालक को देखें तो उसमे 91 ग्राम से ज्यादा मात्रा में पानी पाया जाता है। कई बार देखा जाता है कि डाक्टर मरीजों को पालक का सेवन आवश्यक बताते हैं। मुख्य रुप से पालक उन लोगों को अधिक खाना चाहिए जिनको किडनी में पथरी है या पहले पथरी रही हो। पालक में भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम और कैल्शियम पाया जाता है। पालक के सेवन से बहुत से रोग समाप्त हो जाते हैं, या बहुत से रोग होने का खतरा कम हो जाता है। डाक्टर बताते हैं कि गर्मियों में पालक का सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है। क्योंकि पालक ठंडा होता है। पालक को लगातार खाने से एनिमिया के लक्षणों को कम किया जा सकता है। पालक का सेवन करने का सबसे उचित समय सुबह का समय माना जाता है। कुछ लोगों का सवाल रहता है कि पालक का पाचन कितने समयमें होता है। पालक के पाचन का कोई निश्चित समय तो नहीं है पर 2-4 घंटे में पालक का पाचन हो जाता है। कुछ लोगों का सवाल रहता है कि पालक खाने से क्या- क्या नुकसान हो सकते हैं। लगभग सभी खाद्य पदार्थों का सेवन सभी के लिए अलग अलग रूप से लाभकारी होता सकता है या हानिकारक भी हो सकता है। कुछ लोगों को पालक का सेवन करना अच्छा साबित होता है लेकिन इसमें हिस्टामिन पाया जाता है जिससे कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है।
पालक को उपयोग करने के तरीके
सबको यह पता होता है कि Palak स्वास्थ के लिए लाभदायक होता है, कोई भी खाद्य पदार्थों मानव शरीर के लिए तभी लाभदायक हो सकता है जब उसको उपयोग करने के उचित तरीकों का पता हो। लेकिन कुछ लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि पालक का उपयोग किस प्रकार से किया जाता सकता है, पालक का उपयोग करना बहुत ही आसान है, इसको किसी भी रुप में प्रयोग किया जा सकता है। पालक को उपयोग करने का सबसे बेहतरीन तरीका पालक का जूस बनकर पिया जा सकता है। यदी पालक के जूस का सेवन गर्मियों में किया जाए तो यह स्वास्थ के लिए और अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकता है। पालक का सेवन सब्जी बना कर भी किया जा सकता है। पालक की सब्जी बनाना भी बहुत ही आसान है। पालक की सब्जी बनाना इंटरनेट से आसानी से सीखा जा सकता है। सबसे आसान तरीका यह हैं कि गर्म कडाई में तेल गरम करें और उसमें सरसों का तड़का लगा लें। उसके बाद उस तेल में पालक के पत्तों को कुछ देर उबाल लें, इतनी आसानी से हो जाती है पालक की सब्जी तैयार, या फिर पालक का कपला भी बनाया जा सकता है। Palak का Kapala कैसे बनाया जाता है? यह आपके उपर बताया गया है। पालक के परांठे बना कर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। या रोज़ाना के खाने में पालक के सलाद का सेवन किया जा सकता है, यह तरीका पालक के सेवन का सबसे आसान तरीका है। पालक को दाल में भी डाला जा सकता है।
पालक खाने से क्या फायदे हो सकते हैं?
आंखों के लिए spinach यानि कि पालक बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो सकता है। क्योंकि पालक में भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है। आंखों के स्वास्थ और आंखों की रोशनी को बनाए रखने के लिए भी spinach बहुत ही कारगर साबित होता है। पालक में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है जबकि कैलोरी की मात्रा कम, इसलिए वजन को नियंत्रित करने में भी पालक सही सिद्ध होता है। पालक में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और विटामिन उपलब्ध रहता है जिस कारण यह हड्डियों के स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखता है। या यूं कह सकते हैं इससे हड्डियों की मजबूती बनी रहती है। इसमे आयरन भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है अर्थात यह शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है जिससे एनीमिया की सिकायत खत्म हो जाती है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले विटामिन, विटामिन ए और सी पालक में भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहते हैं, जिससे शरीर वायरस और बैक्टीरिया की चपेट में आने से बच सकता है। पालक के प्रयोग से पाचन सम्बंधित समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। पालक एंटिआक्सिडेंट गुणों से भरपूर होता है, जो कैंसर पनपने नहीं देता है। इस प्रकार देखा जाए तो पालक का उपयोग करने से बहुत अधिक फायदे होते हैं। इसलिए पालक का उपयोग किसी भी उम्र का व्यक्ति कर सकता है।
निष्कर्ष
हरे पत्तेदार सब्जियां स्वास्थ के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होती है। और पालक स्वाद में तो अच्छा होता ही है, साथ में इसका उपयोग भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। विषेषज्ञों ने भी पालक की उपयोगिता को सही सिद्ध किया है। पालक को उपयोग करने के विभिन्न तरीके हैं, जैसे- जूस ,सलाद, सब्जी, दाल में, पनीर में । पालक में ऐसे विभिन्न तत्व विद्यमान होते हैं जो मानव शरीर के लिए बहुत आवश्यक होते हैं , इसमे उपलब्ध आयरन और कैल्शियम की भरपूर्ता के कारण यह हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है। और आंखों की रोशनी के लिए भी यह आवश्यक है। इसका कपला भी बनाया जाता है जो उत्तराखंड के भोज्य पदार्थों में सबसे प्रसिद्ध है।

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