4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस।
भारतीय नौसेना दिवसके संबंध में कुछ लोगों का मानना है कि, उसी दिन भारतीय नौसेना की स्थापना हुई होगी । लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है यदि 4 दिसंबर को नौसेना की स्थापना नहीं हुई तो 4 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है नौसेना दिवस? इस विषय में स्पष्ट जानकारी प्राप्त करने के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़ें। नौसेना का गठन कब हुआ?
इस बात में कोई दो मत नहीं है कि भारत में महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से की थी। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण कार्य नौसेना दल का गठन भी है। लेकिन यह नौसेना दल भारतीय नौसेना नहीं है। इसके बारे में आगे जानते हैं। 1612 ईस्वी में ईस्ट इंडिया कंपनी ने नौसेना रॉयल इंडिया नाम से बनाई थी। लेकिन रॉयल इंडिया नाम से बनाया गया दल वर्तमान नौसेना नहीं है। ना ही यह नौसेना दल वर्तमान नौसेना की तरह कार्य करता था।
ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बनाया गया नौसेना दल सिर्फ ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। यह नौ सैनिक दल कंपनी के जहाजों की देखरेख के लिए बनाया गया था , बाद में इसके आकार में वृद्धि की गई लेकिन यह नौसेना वर्तमान नौसेना नहीं है। 1950 ईस्वी में नौ सैनिक दल को पुनर्गठित करके वर्तमान भारतीय नौसेना बनाई गई।
4 दिसंबर को ही क्यों मनाते हैं भारतीय नौसेना दिवस?
4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाने का मुख्य कारण यह है कि, 1971 में हुए भारत और पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान ने 3 दिसंबर को भारतीय हवाई अड्डों को निशाना बनाया और भारतीय हवाई अड्डों को काफी मात्रा में क्षतिग्रस्त किया। अधिक नुकसान देखते हुए भारत ने पाकिस्तान का जवाब देना चाहा। रणनीतिक तौर पर भारत ने थल सेना और वायुसेना के माध्यम से जवाब देना उचित नहीं समझा । और नौसेना की सहायता से 4 और 5 दिसंबर की रात को पाकिस्तान के सैकड़ो नौसेना के जवानों को पंच तत्वों में विलीन कर दिया । भारतीय नौसेना की उपलब्धि को स्वीकार करते हुए और भारतीय नौसेना की वीरता और पराक्रम के लिए 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाता है।
निष्कर्ष
3 दिसंबर को पाकिस्तान ने भारतीय हवाई अड्डों को क्षतिग्रस्त किया। इसके जवाब में 4 और 5 दिसंबर की रात को भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के सैकड़ो नौसेना के जवानों को मार गिराया। 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाने का मुख्य कारण शहीदों की शहादत को याद रखना और शहीदों को श्रद्धांजलि देना, साथ ही शहीदों के प्रति देशवासियों में प्रेम और सम्मान की भावना को जागृत करना है।
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